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लखनऊ में कैसे बड़ा हो गया मंगल आइए जानते हैं....


पूरे देश में लखनऊ में ज्येष्ठ माह का मंगल बड़ा होता है। पूरे महीने में चार या पांच मंगलवार पड़ता है। इन सभी मंगलवार को पूरे शहर में जगह- जगह मंदिर, चौराहों और सरकारी, निजी प्रतिष्ठानों में बजरंग बली की चालीसा, भजन के बीच दिव्य भंडारे का आयोजन होता है। सुबह से लेकर देर शाम हर भंडारे में लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं। मंगलवार को बड़ा बनाने का यह दृश्य पूरे भारत में नहीं देखने को मिलेगी। अवध की यह परंपरा गजब है। आइए जानते हैं यह मंगल कैसे बड़ा हो गया? इसकी 400 साल पहले की कहानी है। लखनऊ के अलीगंज के पुराने हनुमान मंदिर की स्थापना नवाब शुजाउद्दौला की बेगम और दिल्ली मुगल खानदान की आलिया बेगम ने करवाई थी। यह मंदिर 1792 से 1802 के बीच बनकर तैयार हुआ था। ऐसी मान्यता है कि बेगम के सपने में हनुमान जी आए थे, और बताया कि था कि यहां टीले में प्रतिमा है। बड़ी बेगम के कहने पर जब टीले की खुदाई हुई तो हनुमान जी की प्रतिमा मिली। उनकी प्रतिमा को हाथी पर रखकर मंगाया गया। हनुमान जी की प्रतिमा को गोमतीनदी के पार स्थापित करने की योजना थी, लेकिन हाथी अलीगंज के पुराने हनुमान मंदिर से आगे नहीं बढ़ पाया। फिर यहीं पर उत्सव के साथ मंदिर स्थापित कर दिया गया। मंदिर के गुंबद पर चांद का निशान आपसी भाईचारे का संदेश देता है। एक और बताई जाती है कि मंदिर के स्थापना के तीन साल बाद महामारी फैल गई, इसे दूर करने के लिए बेगम ने से यहां हनुमान चालीसा का पाठ कराया। यह आयोजन मंगलवार को हुआ, वह दिन ज्येष्ठ मास का था। अवध के आखिरी नवाब वाजिद अली शाह ने भी उस परंपरा को आगे बढ़ाया। आज बड़े मंगल पर दूर दराज से लोग आते हैं। डा. पशुपति पांडेय ने बताया कि पहले बड़े मंगल की परंपरा अलीगंज हनुमान मंदिरों से जुड़ी थी। धीरे- धीरे यह अन्य मंदिरों तक पहुंचने लगी। एक अन्य मान्यता यह भी कि इत्र कारोबारी लाला जाटमल ने अलीगंज में हनुमान मंदिरों को बनवाया था। अलीगंज हनुमान मंदिर का विग्रह स्वयंभू भी बताया जाता है, जो जमीन से निकली थी। मान्यता जो भी हो लखनऊ का बड़े मंगल की एक अलग की छटा नजर आती है। यहां हर ज्येष्ठ का मंगलवार बड़ा हो गया। इसमें हिंदू हो या मुसलमान जोर जोश से बड़े मंगल पर उत्सव मनाते हैं, हर जगह चालीसा के साथ भंडारे में दिव्य प्रसाद की व्यवस्था रहती है। अगर मौका मिले तो प्रसाद जरूर लेने आइएगा। अंग्रेजी पढ़ने वाले शायद ज्येष्ठ मास को न समझ पाए, उनके लिए यह बड़ा मंगल मई से जून के बीच में पड़ता है।

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