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एक शेयर मुफ्त, एक हजार का

अमेरिका में बच्चों को संपत्ति में हिस्सेदारी देने का वादा, भारत में निवेशकों के लिए खुल रहा जियो का दरवाजा

दुनिया के दो बड़े उद्योगपतियों एलन मस्क और मुकेश अंबानी की कंपनियों के शेयर इन दिनों अलग-अलग कारणों से चर्चा में हैं। एक ओर मस्क ने अमेरिका के हर बच्चे को स्पेसएक्स का एक शेयर देने का वादा किया है, वहीं दूसरी ओर अंबानी की जियो प्लेटफार्म्स का बहुप्रतीक्षित आइपीओ भारतीय निवेशकों के लिए खुलने जा रहा है। दोनों घटनाएं एक बड़ा सवाल खड़ा करती हैं कि कंपनियों की बढ़ती संपत्ति में आम लोगों और नई पीढ़ी की हिस्सेदारी कितनी होनी चाहिए?
स्पेसएक्स के एक शेयर की बताई जा रही कीमत 147.96 डॉलर है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 14 हजार रुपये होती है। मस्क की घोषणा के अनुसार, 2027 में अमेरिका के बच्चों को एक-एक शेयर देने की योजना है। हालांकि, इसके क्रियान्वयन, पात्रता और शेयर हस्तांतरण की शर्तें अभी स्पष्ट नहीं हैं। 
दूसरी ओर, जियो प्लेटफार्म्स का आइपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा। इसका प्राइस बैंड 1,065 से 1,119 रुपये है, जबकि शेयर का अंकित मूल्य 10 रुपये है। यानी निवेशक को शेयर खरीदने के लिए अंकित मूल्य से सौ गुने से भी अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। 
यहां समझने वाली बात है कि अंकित मूल्य और बाजार में शेयर की कीमत अलग-अलग होते हैं। किसी कंपनी का वास्तविक मूल्य उसके कारोबार, कमाई, भविष्य की संभावनाओं और निवेशकों के भरोसे से तय होता है। जियो ने देश में इंटरनेट और दूरसंचार सेवाओं का विस्तार किया है, लेकिन निवेशकों के लिए यह देखना भी जरूरी है कि कंपनी भविष्य में कितना लाभ कमा सकती है और उसके शेयर का मूल्यांकन कितना उचित है।
मस्क की पहल और जियो का आइपीओ एक-दूसरे से अलग हैं। एक में संपत्ति देने का वादा है, दूसरे में निवेश के बदले हिस्सेदारी खरीदने का अवसर। फिर भी दोनों से यह विमर्श निकलता है कि आर्थिक विकास का लाभ व्यापक समाज तक कैसे पहुंचे।
असली चुनौती केवल बड़ी कंपनियां खड़ी करना नहीं, बल्कि ऐसा आर्थिक वातावरण बनाना है जिसमें बच्चों को अवसर, निवेशकों को उचित प्रतिफल और समाज को विकास का वास्तविक लाभ मिल सके।

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