अगर हम हिंदी में किसी से बात करें तो हिंदी में ही करें। बेवजह हिंदी में अंग्रेजी के शब्द डालने की जरूरत नहीं है। या फिर अंग्रेजी में ही बात करें। हम अंग्रेजी के चक्कर में कई हिंदी के शब्द भूलते जा रहें हैं। आश्चर्य होता है कि आज हिंदी पढ़ाने वाले भी रोमन में हिंदी पढ़ा रहें हैं। पांच मिनट भी बहुत से लोग सही तरीके हिंदी नहीं बोल पाते फिर बहाना कि मेरी हिंदी कमजोर है। यह कह कर हिन्दीवाले ही खुश होते हैं। ऐसे लोगों की अंग्रेजी भी कभी सुनिएगा... एक परिचित डॉक्टर हैं उनके बेटे को पब्लिक स्कूल में हिंदी बोलने पर जमकर डांट लगी। डॉक्टर पिता स्कूल पहुँचे तो उन्हें भी खूब सुनने को मिला। फिर क्या डॉक्टर साहब ने ऐसी अंग्रेजी बोली कि प्रिंसिपल साहब चुप। डॉक्टर साहब यहीं नहीं रुके बोले कि हिंदी बोलने वाले अपने बेटे को वह एमबीबीएस करा कर रहेंगे।आज उनका बेटा एमडी कर दिल्ली एम्स में है। डाक्टर साहब कहते हैं कि अंग्रेजी में भले डाक्टरी की पढ़ाई की इलाज तो अपनी भाषा में करनी है। पढ़े लिखे मरीज भी हिंदी में ही मर्ज की दवा समझते हैं। जिस भाषा में सहज हैं उसी में बोलिए...
संपादकीय क्रिकेट का जुनून, फुटबॉल का भविष्य फुटबॉल विश्व कप और क्रिकेट विश्व कप की तुलना केवल दो खेलों की तुलना नहीं है, बल्कि यह दुनिया में खेलों की लोकप्रियता, आर्थिक शक्ति और खेल संस्कृति का भी प्रतिबिंब है। फीफा विश्व कप 2026 के विजेता को लगभग 50 मिलियन डॉलर (करीब 490 करोड़ रुपये) की पुरस्कार राशि मिलना और क्रिकेट विश्व कप के विजेता को लगभग 4 मिलियन डॉलर मिलना इस अंतर को स्पष्ट करता है। यह अंतर केवल पुरस्कार राशि का नहीं, बल्कि वैश्विक स्वीकार्यता और बाजार की ताकत का है। फुटबॉल आज दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल है। फीफा के 211 सदस्य देश हैं और विश्व कप के लिए 200 से अधिक देश क्वालीफिकेशन खेलते हैं। 2026 से मुख्य प्रतियोगिता में 48 टीमें उतरेंगी। इसके मुकाबले क्रिकेट अभी भी सीमित देशों का खेल है। यही कारण है कि फुटबॉल विश्व कप की दर्शक संख्या, प्रसारण अधिकार और प्रायोजन से होने वाली आय क्रिकेट से कई गुना अधिक है। विडंबना यह है कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला भारत क्रिकेट में महाशक्ति है, लेकिन फुटबॉल में अब तक विश्व कप के लिए भी क्वालीफाई नहीं कर सका। क्रिकेट में भारत...
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