अगर हम हिंदी में किसी से बात करें तो हिंदी में ही करें। बेवजह हिंदी में अंग्रेजी के शब्द डालने की जरूरत नहीं है। या फिर अंग्रेजी में ही बात करें। हम अंग्रेजी के चक्कर में कई हिंदी के शब्द भूलते जा रहें हैं। आश्चर्य होता है कि आज हिंदी पढ़ाने वाले भी रोमन में हिंदी पढ़ा रहें हैं। पांच मिनट भी बहुत से लोग सही तरीके हिंदी नहीं बोल पाते फिर बहाना कि मेरी हिंदी कमजोर है। यह कह कर हिन्दीवाले ही खुश होते हैं। ऐसे लोगों की अंग्रेजी भी कभी सुनिएगा... एक परिचित डॉक्टर हैं उनके बेटे को पब्लिक स्कूल में हिंदी बोलने पर जमकर डांट लगी। डॉक्टर पिता स्कूल पहुँचे तो उन्हें भी खूब सुनने को मिला। फिर क्या डॉक्टर साहब ने ऐसी अंग्रेजी बोली कि प्रिंसिपल साहब चुप। डॉक्टर साहब यहीं नहीं रुके बोले कि हिंदी बोलने वाले अपने बेटे को वह एमबीबीएस करा कर रहेंगे।आज उनका बेटा एमडी कर दिल्ली एम्स में है। डाक्टर साहब कहते हैं कि अंग्रेजी में भले डाक्टरी की पढ़ाई की इलाज तो अपनी भाषा में करनी है। पढ़े लिखे मरीज भी हिंदी में ही मर्ज की दवा समझते हैं। जिस भाषा में सहज हैं उसी में बोलिए...
भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता: एक नया आर्थिक युग भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दोनों देशों के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की उपस्थिति में इस समझौते पर सहमति बनी, और 24 जुलाई 2025 को इसे औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित किया गया। यह समझौता न केवल दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखता है, बल्कि यह वैश्विक व्यापार में अनिश्चितताओं के दौर में एक रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत करता है। इस संपादकीय में हम इस समझौते से भारत को होने वाले लाभ, दोनों देशों के बीच आयात-निर्यात होने वाले सामानों, और इसके दीर्घकालिक प्रभावों का विश्लेषण करेंगे।भारत को होने वाले लाभभारत-यूके एफटीए भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। यह समझौता भारत को लाभ प्रदान करता है: निर्यात में वृद्धि: समझौते के तहत, भारत के 99% निर्यात उत्पादों को यूके में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा, जो भारत के लगभग सभी व्यापार मूल्य को कवर करता है। इससे भारत के श...
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