चंदेल क्षत्रिय: वीरता, कला और स्वाभिमान की अनमोल गाथा जब बात भारत के गौरवशाली इतिहास की होती है, तो चंदेल क्षत्रिय का नाम सुनहरे अक्षरों में उभरता है। ये वो वीर योद्धा हैं, जिन्होंने बुंदेलखंड की धरती पर न केवल तलवारों से युद्ध लड़े, बल्कि कला और संस्कृति के रंगों से इतिहास को सजाया। खजुराहो के भव्य मंदिर हों या कालिंजर का अभेद्य किला, चंदेलों की कहानी हर पत्थर में गूंजती है। तो आइए, इस ब्लॉग में जानते हैं कि चंदेल क्षत्रिय कौन हैं और उनकी पहचान क्या बनाती है—एक ऐसी कहानी जो वीरता, स्वाभिमान और सांस्कृतिक वैभव से भरी है! ## **चंदेल क्षत्रिय: चंद्रवंशी योद्धाओं का गौरव** चंदेल क्षत्रिय, जिन्हें चंदेल राजपूत भी कहा जाता है, चंद्रवंशी वंश के गर्वीले वंशज हैं। मान्यता है कि उनकी उत्पत्ति चंद्रमा (सोमा) से जुड़ी है, और वे चंद्रात्रेय गोत्र से संबंध रखते हैं। 9वीं शताब्दी में नन्नुक नामक वीर ने खजुराहो को अपनी राजधानी बनाकर चंदेल वंश की नींव रखी। यह वंश मध्य भारत के बुंदेलखंड क्षेत्र—यमुना से विंध्य पर्वत तक—में अपनी शक्ति और वैभव के लिए जाना गया। लेकिन चंदेल सिर्फ शासक नहीं थे; ...
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